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मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई थी. (प्रतीकात्मक फोटो:AI)
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. भारत के दो एलपीजी कैरियर जहाज- ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’- सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर बढ़ रहे हैं.
इन जहाजों में करीब 92,700 मीट्रिक टन LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) लदी है. बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा के अनुसार, इन जहाजों के 16 और 17 मार्च तक गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है.
यह खेप ऐसे समय आ रही है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता गहरा गई थी.
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मिडिल ईस्ट से आने वाली गैस सप्लाई पर दबाव पड़ने के बाद देश में रसोई गैस की मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक देशभर में करीब 75 लाख गैस सिलेंडर की बुकिंग लंबित थी, जबकि रोजाना करीब 50 लाख सिलेंडर की ही डिलीवरी हो पा रही थी.
इस स्थिति के कारण कई शहरों में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर मिलने में देरी होने लगी थी.
हालात इतने गंभीर हो गए थे कि सरकार को कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगानी पड़ी थी ताकि घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा सके.
ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित करने के लिए सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई रोक दी थी.
हालांकि, अब स्थिति कुछ बेहतर होने के बाद सरकार ने यह रोक हटा दी है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल LPG सिलेंडर का वितरण फिर शुरू कर दिया गया है.
इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों को राहत मिलने की उम्मीद है.
मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद ईरान ने भारत को भरोसा दिलाया है कि भारतीय जहाजों को होर्मुज मार्ग से गुजरने से नहीं रोका जाएगा.
भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सहयोग करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के दूतावास ने भारतीय जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है.
यह संकरा समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है.
करीब 167 किलोमीटर लंबे इस जलमार्ग का सबसे संकरा हिस्सा सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि समुद्री यातायात के लिए प्रभावी शिपिंग लेन लगभग 3 किलोमीटर चौड़ी है.
दुनिया की लगभग 20% तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल और औसतन 150 से ज्यादा जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं.
इसी वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ जाती है.
एलपीजी संकट को देखते हुए सरकार ने सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए.
इन बदलावों का उद्देश्य गैस वितरण को संतुलित करना था ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंच सके.
सरकार ने गैस वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कुछ नए नियम भी लागू किए हैं.
इन नियमों का मकसद एलपीजी की उपलब्धता को बेहतर तरीके से प्रबंधित करना है.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे जहाजों का भारत की ओर बढ़ना देश के लिए राहत भरी खबर है. करीब 92 हजार टन LPG की यह खेप भारत के गैस स्टॉक को मजबूत करेगी और घरेलू गैस आपूर्ति को स्थिर करने में मदद कर सकती है. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह आपूर्ति बनी रहती है तो देश में गैस संकट की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है.
शुभम् शुक्ला, ज़ी बिज़नेस डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर (Assistant Editor) के पद पर ह� ...Read More
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